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सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन | Religious Reform Movement in hindi

भारत में 19 वीं शताब्दी की शुरुआत से ही भारतीयों की स्तिथि में सुधार करने के लिए कुछ सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन शुरू हो गए| जिसमें सबसे पहला सुधार आन्दोलन था राजा राममोहन राय द्वारा ब्रह्म समाज की स्थापना| भारत में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन से जुड़े नेताओं का प्रमुख उद्देश्य हमारे समाज का सामाजिक, धार्मिक, और मानसिक कल्याण करना था| इस आन्दोलन के नेता यह मानते थे की जिस देश में महिलाएं उपेक्षित हो वह देश सभ्यता के क्षेत्र में प्रगति नही कर सकता| अत महिलाओ की स्तिथी में सुधार के कई प्रयास किए गए| जैसे बाल विवाह, पुरोहित विवाह, विधवा व्यवस्था, सती प्रथा एवं पर्दा प्रथा का विरोध करना आदि|

 

सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन

1) ब्रह्म समाज

20 अगस्त 1828 ईसवी में ब्रह्म समाज की स्थापना राजा राम मोहन राय द्वारा कोलकाता में की गई|

1814 ईसवी में राजा राममोहन राय ने आत्मीय सभा की स्थापना की|

1817 ईसवी में राजा राममोहन राय ने डेविड हेयर की सहायता से हिंदू कॉलेज की स्थापना की|

1820 ईसवी में राजा राममोहन राय ने प्रिसेप्ट्स ऑफ जीसस की रचना की|

1825 ईसवी में राजा राममोहन राय ने वेदांत कॉलेज की स्थापना की|

1830 ईसवी में मुगल बादशाह अकबर द्वितीय ने राजा राम मोहन राय को राजा की उपाधि के साथ अपने दूत के रूप में तत्कालीन ब्रिटिश सम्राट विलियम चतुर्थ के दरबार में भेजा|

सुभाष चंद्र बोस ने राजा राममोहन राय को युग दूत की उपाधि से सम्मानित किया|

 

 

2) आर्य समाज

1875 ईसवी में स्वामी दयानंद सरस्वती ने मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की|

इन्होंने बाल विवाह, पुरोहित विवाह, विधवा व्यवस्था, सती प्रथा एवं पर्दा प्रथा का विरोध किया|

वेदों की ओर लौटो का नारा दिया|

1883 ईसवी में अजमेर में उनकी मृत्यु हो गई|

दयानंद सरस्वती को उत्तर भारत का मार्टिन लूथर कहा जाता था|

 

3) रामकृष्ण मिशन

1893 ईसवी में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में हुई धर्म संसद में भाग लिया|

1896 ईसवी में स्वामी विवेकानंद न्यूयोर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की|

1897 ईसवी में स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की|

स्वामी विवेकानंद, दक्षिणेश्वर के स्वामी कहे जाने वाले रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे|

1900 ईसवी में विश्व के धर्मों के इतिहास पर चर्चा हेतु पैरिस गए थे|

 

4) थियोसॉफिकल सोसायटी

1875 ईसवी में थियोसॉफिकल सोसायटी की स्थापना मैडम बलावत्सकी तथा कर्नल अल कार्ड द्वारा न्यूयॉर्क में की गई|

भारत में संतुलन की गतिविधियों को व्यापक रूप से फहराने का श्रेय एनी बेसेंट को दिया जाता है|

1898 ईसवी में एनी बेसेंट ने बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की जिसे बाद में मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया|

 

5) यंग बंगाल आंदोलन

इसे प्रारंभ करने का श्रेय हेनरी विवियन विरोजियो को जाता है।

एंग्लो इंडियन तेरो जिओ कोलकाता में हिंदू कॉलेज के अध्यापक थे।

विरोधियों ने ईस्ट इंडिया नामक दैनिक पत्र का भी संपादन किया।

 

6) प्रार्थना समाज

1867 ईसवी में प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने की|

प्रार्थना समाज की स्थापना का उद्देश्य जाति प्रथा का विरोध, स्त्री पुरुष विवाह की आयु में वृद्धि, विधवा विवाह, स्त्री शिक्षा आदि को प्रोत्साहन देना था।

 

7) वहाबी आंदोलन

वहाबी आंदोलन के प्रमुख संत अब्दुल वहाब है|

इस भारत में प्रचारित करने का श्रेय सैयद अहमद अल्वी एवं मिर्जा अजीज को दिया जाता है|

इस आंदोलन का उद्देश्य दर-उल-हर्ब को दर-उल-इस्लाम में बदलना था।

 

8) अलीगढ़ आंदोलन

यह सर सैयद अहमद खान द्वारा अलीगढ़ में चलाया गया|

उन्होंने अलीगढ़ में आंग्ल-मुस्लिम स्कूल जिसे अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कहा जाता है की स्थापना की|

 

9) अहमदिया आंदोलन

1889 ईसवी में मुस्लिमो में आधुनिक ओद्योगिक और तकनिकी प्रगति को धार्मिक मान्यता देने हेतु पंजाब में मिर्जा गुलाम अहमद द्वारा यह आन्दोलन चलाया गया|

इस आंदोलन में शुद्धि आंदोलन तथा ईसाई के विस्तार पर रोक लगाई|

गुलाम अहमद पश्चिमी उदारवाद, ब्रह्मा विद्या तथा हिंदुओं के धार्मिक सुधार आंदोलन से अत्यधिक प्रभावित थे|

 

10) देवबंद आंदोलन

1866 से 1867 ईसवी में देवबंद आन्दोलन चलाया गया|

मुस्लिम संप्रदाय के लिए धार्मिक नेता तैयार करने तथा विद्यालयों में अंग्रेजी शिक्षा को प्रतिबंधित करने हेतु यह आंदोलन चलाया गया।

अबुल कलाम आजाद इस आंदोलन से जुड़े हुए थे|

इसमें अंग्रेजी व्यवस्था तथा अलीगढ़ आंदोलन का विरोध किया|

 

उल्लेख से स्पष्ट है की इन सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के परिणामस्वरुप भारत में तर्कवादी सोच को बढ़ावा मिला| शिक्षा का प्रसार होने से अखिल भारतीयता की राष्ट्रभावना का प्रसार हुआ| इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रचार भी भारत में जोरो शोरो से होने लगा| इन आंदोलनों को भारत के गवर्नर जनरल का पूरा सहयोग मिला| 1829 ईसवी में राजा राममोहन राय के सहयोग से लार्ड विलियम बैंटिक ने सती प्रथा को समाप्त कर दिया और शिशु बालिका की हत्या पर भी प्रतिबंध लगा दिया|



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